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Prayer
आता विश्वात्मके देवे येणे वागयदने तोषावे तॉशोवनी मज द्यावे पसायदान हे ||1|| जे खलांची व्यंकाटी सांडो तया सत्कर्मी रती वाढो भूता परस्परे जाडो मैत्र जीवांचे ||2||
दुरितांचे तीमीर जाओ विशस्वधर्म सूर्ये पाहो जो जे वांछील तो ते लाहो प्राणीजात ||3||
वर्षात सकालमंगली ईश्वरानीष्ठांची मांदियाळी अनवरत भूमंडळी भेटतु तया भूता ||4||
चला कल्पतरून्चे आरव चेतना चिंतामनीचे गाव बोलते जे आर्णाव पियुषांचे ||5||
चंद्रमे जे आलांछान मार्तंड जे तापहिन जे सर्वाही सदा सज्जन सोयरे होतू ||6||
किंबहुना सर्वा सुखी पूर्ण होऊनी तिन्ही लोकी भजी जो आदिपुरुखी अखंडित ||7||
आणि ग्रन्थोप्जीविये विषेशी लोकी इये दृष्टादृष्टविजये होआवे जी ||8||
येथ म्हणे श्री विश्वेश्वराओ आ होईल दान पसाओ येणे वरे ग्यानदेओ सुखीया जाला ||9||
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